द न्यू वेव/ २६ जनवरी २००९
साथियों,
विश्व पूंजीवाद के मौजूदा संकट के चलते हताशा और चिंता से घिरे भारत के पूंजीवादी शासक, इस बार गणतंत्र की रस्म अदायगी, आनेवाले महाविनाश की आशंका और भय के बीच करेंगे। पूंजीवाद की जिस बर्बर आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था पर वे अब तक इतराते रहे, वह दुनिया भर में ख़ुद अपने ही बोझ तले दम तोड़ने के कगार पर है।